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About करण वंदना
(DBW 187)

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करण वंदना (DBW 187) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों की सिंचित समय पर बुवाई की जाने वाली नवीनतम गेहूँ की किस्म है।

क्षेत्र में मौजूदा किस्मों मसलन, एचडी 2967, के 0307, ​​एचडी 2733, के 1006 और डीबीडब्ल्यू 39 की तुलना में इस किस्म की पैदावार में काफी फायदा हुआ है। यह पत्तों के झुलसने और उनके अस्वस्थ दशा जैसी महत्त्वपूर्ण बीमारियों के खिलाफ बेहतर प्रतिरोध करता है। बुवाई के 77 दिनों बाद करण वंदना फूल देती है और 120 दिनों बाद परिपक्व होती है। इसकी औसत ऊँचाई 100 सेमी है जबकि क्षमता 64.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। 10 में 7.7 अंक और 43.1 लौह सामग्री के साथ इस किस्म की चपाती की गुणवत्ता बहुत बेहतर होती है।

करण वंदना (DBW 187) क्यों है ख़ास?

Factor 01

इस किस्म में अधिक पैदावार देने की क्षमता है|

Factor 02

ब्लास्ट नामक बीमारी से भी लड़ने की सक्षम है|

Factor 03

इसमें प्रोटीन के अलावा जैविक रूप से जस्ता, लोहा और कई अन्य महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं|

Factor 04

इस गेहूं की किस्म को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं है 2-3 सिंचाई ही करण वंदना (DBW 187) किस्म के लिए काफी है|

ब्लास्ट रोग से लड़ने में सक्षम

सामान्य तौर पर धान में 'ब्लास्ट' नामक एक बीमारी देखी जाती थी, लेकिन अभी हाल में पहली बार दक्षिण पूर्व एशिया में गेहूं की फसल में इस रोग को पाया गया था. तभी से उत्तर पूर्वी भारत की स्थितियों को देखते हुए गेहूं की इस किस्म को विकसित करने के लिए शोध कार्य शुरू किया गया

मात्र 120 दिनों में तैयार होती है फसल

इस नई किस्म की खासियत है कि गेहूं की बुवाई के बाद फसल की बालियां 77 दिनों में निकल आती है. इससे पूरी तरह फसल कुल 120 दिन तैयार हो जाती है

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करण वंदना (DBW 187)

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